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चविट्टु नाटक: एक अनमोल कला
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डॉ. रानी जास्मिन थॉमस एन. सहा.प्राध्यापिका,हिन्दी विभाग, सेंट थॉमस कॉलेज (ऑटॉनमस),त्रिश्शूर त्रिश्शूर, केरल, भारत .

Abstract

चविट्टु नाटकम या चविट्टु नाटक केरल की ऐतिहासिक और ईसाई परंपरा की एक अद्भुत कला है, जिसमें प्रांतीय कलाओं और संस्कृति के साथ यूरोपीय कला और संस्कृति का समन्वय हुआ है। यह शोध लेख चविट्टु नाटक की ऐतिहासिक उत्पत्ति, विशेषताएँ, प्रदर्शन, विषयवस्तु तथा समकालीन दशा का अध्ययन करता है। गुणात्मक शोध पद्धति के अंतर्गत पाठ्य विश्लेषण और द्वितीयक स्रोतों का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आधुनिकता, संस्थागत सहयोग की कमी, बजट का अभाव और लोगों में इसके संबंध में गलत धारणाएँ आदि के कारण यह कला मृत होने जा रही थी। प्रस्तुत लेख चविट्टु नाटक के महत्त्व और पहचान पर बल देते हुए उसके संरक्षण, प्रलेखन, शैक्षणिक सहभागिता आदि के माध्यम से  इस अनमोला कला को देशीय स्तर पर पहचान दिलाने और उसे सुरक्षित रखने को रेखांकिंत करता है।

 

बीज शब्द: चविट्टु नाटक, केरल की संस्कृति में विदेशियों का प्रभाव, ईसाई पारंपरिक कला,

केरल के सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक रंगमंच, सास्कृतिक समन्वय की कला।



Published On :
2025-02-28

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