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Expression of Farmer and Labor Life in Nagarjunas Poetry: A Special Study
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डॉ. शैलकुमारी अहिरवार प्रभारी प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय मझगवां, जिला सतना (म. प्र.)

Abstract

आधुनिक हिंदी काव्य में बाबा नागार्जुन एक ऐसे लोकप्रिय कवि के रूप में सामने आते हैं, जिन्होंने अपनी कविताओं के द्वारा सीधी-सादी जनता को जगाने का काम किया है। कुछ उनकी कविताएं हैं जो किसान और श्रमिकों के दु:ख – दर्द,  समस्या, भुखमरी, विषमता, शोषण, बेकारी, आर्थिक असमानता आदि को न केवल देखा है, बल्कि उन्होंने किसानों, मजदूरों की समस्याओं को समझते हुए अपने काव्य का विषय बनाया है। जिससे कमजोर कृषक, श्रमिक को उनके वास्तविक अधिकार से अवगत कराया जा सके। और वह अपने हक की लड़ाई लड़ सके। कवि नागार्जुन के काव्य में सिर्फ किसान, श्रमिक को असहाय के रूप में ही नहीं बल्कि संघर्षशील और परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उद्घाटित किया है।

उनकी कविताओं में शोषित वर्ग संघर्षरत है वह अपनी आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक सभी स्थितियों में संघर्ष करता हुआ नजर आता है। कवि ने इस शोषण के खिलाफ तीखे स्वर में व्यंग्य किया है। इस शोध पत्र में कवि नागार्जुन के काव्य में अंतर्निहित किसान और श्रमिक जीवन की दशा और संघर्षशीलता के विभिन्न आयामों और उसकी सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक स्थिति का विश्लेषण किया गया है। जिससे उसकी जनवादी चेतना और प्रगतिशील दृष्टि का स्पष्ट बोध होता है।

मुख्य शब्द:– किसान जीवन, जनवादी कविता, प्रतिवाद, श्रमिक चेतना, सामाजिक यथार्थ, वर्ग संघर्ष,  सामाजिक, परिवर्तन।



Published On :
2026-02-21

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