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हरियाणा में स्वतंत्रता आंदोलन का सामाजिक आर्थिक विश्लेषण (1857 to 1947)
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रविता, सहायक प्राध्यापक, एमआर डीएवी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, रोहतक

Abstract

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा (तत्कालीन पंजाब प्रांत का हिस्सा) का योगदान ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, किंतु मुख्यधारा के इतिहास में इसे अपेक्षाकृत कम स्थान दिया गया है। यह शोध-पत्र 1857 से 1947 तक हरियाणा के सामाजिक-आर्थिक संदर्भ में स्वतंत्रता आंदोलन का विश्लेषण करता है। ब्रिटिश भूमि-राजस्व नीति, कृषि-व्यावसायीकरण, ऋणग्रस्तता और सामाजिक असमानता ने ग्रामीण समाज को विद्रोह के लिए प्रेरित किया। 1857 के विद्रोह से लेकर गांधीवादी आंदोलनों, भारत छोड़ो आंदोलन और आजाद हिंद फौज तक हरियाणवी जनता ने बहादुरी से भाग लिया। महिलाओं, किसानों और स्थानीय नेताओं की भूमिका, जाति-धर्म से परे सामाजिक एकता तथा आर्थिक शोषण के प्रतिरोध ने इस क्षेत्र को स्वतंत्रता संग्राम का अभिन्न अंग बनाया। स्वतंत्रता के बाद भूमि सुधारों ने सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन को गति दी। यह अध्ययन द्वितीयक स्रोतों, सरकारी अभिलेखों और क्षेत्रीय इतिहास पर आधारित है, जो हरियाणा के योगदान को राष्ट्रीय संदर्भ में स्थापित करता है।

मूल शब्द: हरियाणा, स्वतंत्रता संग्राम, 1857 विद्रोह, सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण, ब्रिटिश भूमि नीति, महिला भागीदारी।



Published On :
2026-04-01

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