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| Swami Vivekanandas Philosophy of Education |
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Author Name Dr. Sunil Kumar Singh Bagjorawar Srinivas Dham Jigna Mirzapur (Uttar Pradesh) Abstract स्वामी विवेकानंद, एक महान भारतीय व्यक्तित्व हैं जिन्हें रहस्यवादी, दार्शनिक, शिक्षाविद और योगिक संत के रूप में जाना जाता है। उन्हें पश्चिमी जगत में वेदांत और योग के दर्शन को फैलाने में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने 1893 में शिकागो, अमेरिका में आयोजित 'धर्म संसद' में अपने भाषण से भारत को गौरवान्वित किया। उनका दृढ़ विश्वास था कि किसी भी राष्ट्र का विकास उसके जन-विकास पर निर्भर करता है और शिक्षा की भूमिका को मानव विकास के मार्ग का पूर्णतया अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के विभिन्न उद्देश्यों की वकालत की जो व्यक्तिगत से लेकर सामाजिक और सार्वभौमिक स्तर तक जाते हैं। उनके द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रम भी उनके दर्शन का प्रतिबिंब है, जिसका सीधा संबंध आत्म-विकास, क्षमता निर्माण और सार्वभौमिक विकास से है। उनकी शिक्षण विधियाँ पूरी तरह से पश्चिमी और भारतीय दर्शन पर आधारित हैं। उन्होंने शिक्षक और विद्यार्थी दोनों के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किया है। अपने शैक्षिक दर्शन में उन्होंने महिला शिक्षा, शांति शिक्षा और नैतिक एवं मूल्य शिक्षा पर विशेष बल दिया है। Published On : 2026-01-19 Article Download :
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